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संपादकीय..

  • Aabhushan Times
  • Mar 13
  • 3 min read

ज्वेलरी में मंदी सेल से क्या घबराना,

चुनौती बड़ी है तो संभावनाएं भी अनेक


सिद्धराज लोढ़ा


भारत में गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने ज्वेलरी उद्योग को बड़ी चुनौती में डाल दिया है। गोल्ड और सिल्वर दोनों की महंगाई के इस दौर में ज्वेलरी शो रूम्स में ग्राहकों की घटती संख्या और ज्वेलरी कम होती मांग से परेशान ज्वेलर्स कमाई के लिए जूझ रहे हैं। वैसे देखा जाए, तो भारतीय समाज में गोल्ड और सिल्वर को न केवल ज्वेलरी के रूप में बल्कि निवेश और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी देखा जाता है, इसलिए निवेश के रूप में बुलियन की डिमांड जरूर बढ़ रही है, लेकिन ज्वेलरी की ग्राहकी न खुलने से ज्वेलर चिंतित हैं। मगर, बाजार का ये हाल इसलिए है क्योंकि गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि आम लोगों की खरीद क्षमता को प्रभावित कर रही हैं, जिससे ज्वेलर्स की ज्वेलरी की सेल में भारी गिरावट आई है 'आभूषण टाइम्स' बाजार की इस चिंता को समझ रहा है तथा यह भी देख रहा है कि कुछ नए आइडिया वाले ज्वेलर्स इस संकट से उबरने के प्रयास भी कर रहे हैं।


गोल्ड व सिल्वर की बढ़ती कीमतें हमेशा मंदी की स्थिति लाती रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक और घरेलू आर्थिक स्थितियों के कारण गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। ज्वेलर्स के शो रूम्स में ग्राहकी न होने तथा बाजार में मंदी की सबसे बड़ी वजह यही है कि आम उपभोक्ता अब सोच-समझकर खर्च कर रहा है। पहले जहां लोग त्यौहारी सीजन, विवाह और पारंपरिक अवसरों पर बड़ी मात्रा में गोल्ड-सिल्वर खरीदते थे, अब वे छोटी-छोटी खरीदारी तक सीमित रह गए हैं। जिन परिवारों का बजट सीमित है, वे अब लाइट वेट ज्वेलरी पसंद कर रहे हैं तथा जिनका बजट बिल्कुल ही गड़बड़ा गया है, वे खास अवसरों के लिए इमीटेशन आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं। महंगे होते गोल्ड-सिल्वर के कारण ग्राहकों की संख्या घटी है, जिससे छोटे और मध्यम ज्वेलर्स को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। छोटे कारोबारियों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन हो गई है। खास बात यह भी है कि कस्टमर की बदलती पसंद का भी आसर रहा है। लोग अब हल्के और डिजाइनर गहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि पारंपरिक भारी गहनों की मांग कम हो गई है।


'आभूषण टाइम्स' का दावा है कि गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में कमी कभी नहीं आएगी, तथा ये बात भी है कि लगातार होने वाली रेट में वृद्धि से ज्वेलरी उद्योग को और भी बड़ी चुनौतियां मिलने की संभावनाएं हैं। ऐसे में ज्वेलरी मार्केट की प्रमुख पत्रिका होने के नाते 'आभूषण टाइम्स' का कर्तव्य है कि हम इससे उबरने के समाधान भी आपको सूचित करें। वैसे, तो देश का हर ज्वेलर बेहद समझदारी से अपने बिजनेस को बढ़ाता है, लेकिन ग्राहकी कम होने से परेशानी में 'आभूषण टाइम्स' ने भी इस समस्या के समाधान के तौर पर कुछ सुझाव तलाशे हैं। जिनमें ज्वेलरी की डिजिटल और ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा, हल्के वजन और बजट फ्रेंडली डिजाइन्स, कस्टमाइज्ड और यूनिक डिजाइन्स, ओल्ड ज्वेलरी की रीमॉडलिंग, सहित फाइनेंस और ईएमआई स्कीम जैसे कुछ खास सेल बढ़ाने के तरीके अपनाना जरूरी है। ज्वेलर्स को अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों तक पहुंचना होगा। 'आभूषण टाइम्स' का भरोसा है कि ग्राहकों की बदलती पसंद के अनुसार हल्के और रोजाना पहनने वाले गहनों को प्रमोट करने, बाजार में खुद को अलग दिखाने के लिए अनोखे और आधुनिक डिजाइन्स पेश करने, ग्राहकों को उनके पुराने गहनों को नया रूप देने की सुविधा देकरज्वेलरी में उनकी रुचि बनाए रखने, तथा ग्राहकों को आसान किस्तों में भुगतान करने का विकल्प देने से ज्वेलरी की बिक्री को बढ़ाया जा सकता है।


भारतीय ज्वेलरी की वैश्विक लोकप्रियता है तथा भारतीय ज्वेलरी अपनी उत्कृष्ट कारीगरी और अनूठे डिजाइनों की वजह से दुनियाभर में मशहूर है। कुंदन, पोल्की, मीनाकारी, और टेंपल ज्वेलरी जैसे ट्रेडिशनल डिजाइन्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मांग है। अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट और दक्षिण पूर्व एशिया में भारतीय आभूषणों को खासा पसंद किया जाता है।लेकिन गोल्ड और सिल्वर की बढ़ती कीमतों ने ज्वेलरी बाजार को मंदी की ओर धकेला है। यदि ज्वेलर्स नई रणनीतियों को अपनाएं, मार्केटिंग के अत्याधुनिक तरीकों पर ध्यान दें और ग्राहकों की पसंद को समझकर नए डिजाइन पेश करें, तो हर ज्वेलर इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी टिके रह कर बड़ी कमाई करने मेंसक्षम साबित हो सकता है। 'आभूषण टाइम्स' की तरह ही आप भी यह अच्छी तरह से जानते हैं कि भारतीय ज्वेलरी का भविष्य उज्ज्वल है, सेल बढ़ाने के लिए बस जरूरत है सही रणनीति और नवाचार की, और फिर भी संकट बना रहे, तो कुछ दिन इंतजार करने की जरूरत है। क्योंकि गोल्ड और और सिल्वर की कीमतों में कमी कभी होगी नहीं और आखिर ग्राहक को बाजार में तो आना ही पड़ेगा, क्योंकि ज्वेलरी का आकर्षण हर किसी को लुभाता है।

 
 
 

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